सच्ची कविताएं- भारत के स्मृति गुरु व कवि प्रो एन एल श्रमण

Citation
, XML
Authors

Abstract

मेमोरी गुरु की कविताएं एन- प्रो एन एल श्रमण भारत के कवि ( Memory Guru Prof N L Shraman- A Poet of India) की मूल रचनाएं पाठकों के लिए यहां प्रस्तुत हैं

सच्ची कविताएं

जिसके कपड़े फटे नहीं वो पैबंद लगाना क्या जाने.

जिसके घर न लगी आग वो आग बुझाना क्या जाने.

रहे लड़ाते जिस समाज को वह शांति कराना क्या जाने.

रहे कभी ना धूप में जो वह पेड़ लगाना क्या जाने.

जूझे कभी नहीं प्यास से वो कुआं खोदना क्या जाने.

पेट भरा है जिस मानुष का वो फसल उगाना क्या जाने.

कलश छलकते जिस घर में वो चुल्लू में पीना क्या जाने.

घर बैठे जिसको दान मिले वह मेहनत करना क्या जाने.

घर जिनके बग्घी चलती हो वह पैदल चलना क्या जाने.

चांदी कें बर्तन घर में हो वो पत्तल में खाना क्या जाने.

गोरू का चमड़ा पैर में हो वो गोखरू के दर्द को क्या जाने.

बना रखा है घर में मंदिर वो वह तीरथ करना क्या जाने.

छल कपट दंभ का अन्न भरा वो तड़प भूख की क्याजाने.

लूटा सदियों से मातृ देश को वो सरहद पर लड़ना क्या जाने

बुड्ढा होगा तेरा बाप

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

तब नौकर था अब मालिक हूँ, तब तेरा था अब मेरा है।

अंधियार हटा आया प्रकाश, अब साँझ नहीं सबेरा है॥

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

आयु काल व अंत हीन, यह अचेतन मेरा चेतन है।

श्वेत केश अनुभवी साठ, यह अनुभव ही मेरा वेतन है॥

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

दुनिया के जितने बड़े काम,सबने साठ के बाद किये।

न्यूटन, सुकरात, विनोबा, गांधी , तभी तो हैं आज जिये॥

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

जीवन वर्षों की उड़ान नहीं, लहराये जवानी सरसों में।

तुम जोड़ो वर्षों को जीवन में,हम जीवन को जोड़े वर्षों में॥

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

अनंत जीवन के हम बच्चे, जो अंतकाल को न जाने।

अमरत्व नित्यता मुझ में है, हम डरना मरना क्या जाने॥

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

स्वागत है आगत वर्षों का, दुनिया को मेरी जरूरत है।

खोजोगे तुम भी रोज मुझे ऐसी ही मेरी सूरत है॥

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

माना कि हम कल ना होंगे, पर गीत हमारा गायेंगे।

हम खायें या ना खायें , पर फल वृक्ष लगाकर जायेंगे॥

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

हम आश्चर्यजनक हैं लाठी छूटेगी, पर गाँठ न टूटेगी।

हम खास ही हैं टूट जायेगी साँस पर आस न छूटेगी॥

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

घर बैठ निराश हताश अगर,अपना जीवन खो देगा।

तैरती है लाश सतह पर जो जिन्दा है वह डूबेगा।।

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

जीवन में रुची बढ़ेगी जब स्मृति गुरू पट खोलेगा।

मिल जाये मुर्दा एक बार वह भी उठकर बोलेगा ॥

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

द्रोणाचार्य दधीचि है हम, हमने तुम्हें सिखाया चलना।

क्या कहते हो कौन है हम, जब सीख चुके पलना बढ़ना॥

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

गुरु हैं हम आचार्य हैं हम, तुम तो निबल निरक्षर थे।

भूल गये वह दिन जब, हमने सिखाए अक्षर थे॥

पहलेआप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

क ख ग घ न जानो , अक्षर भैंस बराबर काला था।

पाटी बस्ता पोथी लेकर हमने ही भेजा शाला था॥

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

तुम्हें समय का ज्ञान नहीं, समय कभी नहीं रुकेगा।

आज जहाँ पर हम हैं खड़े,तेरा सिर यहीं झुकेगा॥

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

प्रेम, हर्ष, धैर्य, शान्ति, इन सबकी महिमा क्या जानो।

उच्च शिखर पर मेरा आसन तुम भद्र पुरुष को क्या जानों।

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

तुम क्या जानों मुझ में क्या हैं , शिष्य कभी तो बने नहीं।

अभी जान लो धन, छल, रूप यौवन अधिकार टिके नहीं।

पहले आप पहले आप, बुड्ढा होगा तेरा बाप……

विद्या का हमको मद है इसको सीखी कहाँ कहाँ ।

यह नाई का उस्तरा कैंची है जाओ चले चाहे जहाँ।


प्रदूषण

“ धुएँ से प्रदूषण होता है “ प्रदूषण अधिकारी ने समझाया ।

“ धुआं समाज का कैंसर है” पर गंगाराम समझ न पाया ॥

वे बोले इस जहर को समाज से दूर करने का उपाय तो बतलाओ।

अधिकारी ने कहा “ इसे दूर करने के लिए सौ अगरबत्ती सुलगाओ।।

अधिकारी ने दलील दी “ जहर जहर को मारता है युग पुरुष कह गये।

गंगाराम सौ की जगह एक हजार बती जलाकर खुदधुएँ से मर गये॥

अकाल से मुक्ति

दे श में अकाल था, भुखमरी थी, हर आदमी कंगाल था ।

न पानी था न अनाज था, देश का बुरा हाल था॥

पंडित जी ने सुझाव दिया,

बची खुची सामग्री से हवन करा डालो ।

जो बचा है उसे भी आग में जला डालो,

दूर हो जायेगी आसुरी,

जब कुछ भी नहीं बचेगा, न हम बचेंगे , न तुम बचोगे

“ न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी ॥

बैंक के पटल पर महिला

बैंक के पटल पर एक महिला आयी, धीरे से मुस्करायी।

मंद स्वर से कुछ बोली, मैं समझा नहीं, वह लजाई फिर सकुचायी॥

मैं बोला “ ऐ सुकुमारी क्या कार्य है, अपना प्रयोजन तो बतलाओ “ ।

पटल पर सम्मुख नजदीक तो आ जाओ ।

निक्षेप है या आहरण, सांकेत दूँ या पुस्तिका ।

“ मुद्रा लेनी है” उसने कहा, चेक तो लाओ मैने संकेत किया ।

उसने पर्स खोला, चेक को तटोला, चेक न मिली ।

“ हाय राम मैने चेक को क्या किया” वह बुदबुदायी ॥

उसके चेहरे पर छा गयी उदासी, लगने लगी वर्षों की प्यासी ।

लगा था चेक कहीं खो गयी हो, और चेक में वह खुद खो गयी हो॥

लग रही थी हसीना, जव चेहरे पे आ गया पसीना ।

वह पहने थी मुद्रिका जिसमे था एक नगीना ।

जैसे ही उसने पसीना पोंछा, आ गयी मुझको हँसी ।

क्योंकि उस नगीना वाली अंगूठी में चेक थी खुसी ॥

चपरासी की छुट्टी

पुरुष प्यून ने लीव के लिए अप्लाई किया ।

अप्लीकेशन मैनेजर को सप्लाई किया …

मैनेजर ने प्यून को बुलाया, उसे ठीक से समझाया ।

तुम्हारी एक भी लीव बैलेंस नहीं है-

नो पी एल, नो सी एल, सिक लीव भी नहीं बची है।

इतनी ज्यादा लीव क्यों लेते हो, क्या आफत मची है॥

प्यून ने रिक्वेस्ट किया “सर” कुछ तो निभाओ फ़्रैटर्निटी ।

जब कुछ भी नहीं बचा है, तो सैंक्सन कर दो मैटर्निटी ॥

Peon applied for a long leave,

He supplied an application to the Manager to relieve.

The Manager in the noon, called the peon.

You have no balance of any kind of leave you believe.

Why you enjoy so much leave in vain.

No PL, no CL, and no SL, I can’t you relieve .

Peon requested, Sir, show some fraternity,

When all leave exhausted , please sanction me leave maternity

शर्म से कहो हम हिन्दू हैं

(1)

“आप का नाम, श्री मान “

मैने बताया “ राम चन्दर “

लगता है हिन्दू हो, बस या कुछ आगे पीछे।

आप चाहे तो कुछ भी लगा सकते हैं ।

चाहें तो आगे “ श्री” और पीछे “ जी” लगा सकते हैं॥

उसने सोचा न शर्मा न वर्मा न सिंह लगाते यह सज्जन ।

मुझको लगता है ये होंगे निश्चय ही पिछड़े जन ।

फिर भी शक दूर करने के लिए,

“ आप कौन भाई हैं यानी कौन बिरादरी हैं “

अगला प्रश्न किया ।

मैने कहा “ शर्म से कहो हम हिन्दू हैं ॥

(2)

जब भी इस शहर में कोई बड़ा अफ़सर आता है।

अपने नाम के आगे कोई बढ़िया जाति सूचक शब्द नहीं लगाता हैं॥

लोग सोचते हैं कि कोई नीच जाति का होगा।

ऊपर से “ साहब, साहब “ पर मन में नहीं सुहाता है॥

चिकनी चुपड़ी बातें करके जब वोट लेने आता है ।

“ गर्व से कहो हम हिन्दू है” यह नारा हमें सिखाता है॥

मैने सोचा दिमाग को कुरेचा, हम भी सर नेम लगाएंगे ।

लोग तुरंत समझ जायेगे कि हम भी पक्के हिन्दू हैं, अनुमान न लगायेंगे॥

सारे उपनाम सोचे, एक उत्तम पाया।

नाम के आगे गौतम लगाया।

(3)

आपका नाम “ जी ……………………गौतम”

मैं भी गौतम हूं कन्या का विवाह करना है।

आप सुयोग्य और उत्तम हैं, इसलिए आपको चुनना है॥

मैने कन्या देखी, मन को भा गयी, मेरे दिल मे छा गयी।

चट मंगनी पट व्याह हुआ, पत्नी मैके से ससुराल आ गयी॥

यह क्या आप तो “ …जाति के हैं”, पहले क्यों नहीं बताया॥

किसी ने पूछा ही नहीं, मैने हो चुकी पत्नी को बताया॥

मैं समझी आप वही गौतम होंगे जो मैं हूँ ।

मैने कहा “ मैं वही हिन्दू हूँ जो तुम हो “

“ शर्म से कहो हम हिन्दू है”

(4)

एक बार हमारे शहर के “ दैनिक ” में यह खबर आयी।

धर्म के ठेकेदार हर प्रश्न का उत्तर देंगे, फ़ोन कर आज दो लिखाई।

फोन उठाया, कल्लू नाम लिखाया, हम हिन्दू बनना चहते हैं बताया।

हमें किस वर्ण व जाति में रखोगे हमे यह बताओ।

धर्म बदलना चहते हैं तुरंत हिन्दू बनाओ।

जवाब आया “ ब्रह्मण, छत्रिय व बैश्य तो बना न पाऊंगा।

हर आदमी ब्राह्मण बन जायेगा, इसलिए शूद्र ही बनाउंगा॥

यदि हिन्दू से ईसाई सिक्ख या मुसल्मान बने हैं ।

जाती वर्ण नहीं बदलेगे फिर से कितने हिन्दू बने हैं।

“ गर्व से कहो हम हिन्दू हैं”

वीणा की कराह

नूपुर से घायल होने पर वीणा क्रन्दन करती है ।

आहत ताड़ित होने पर नूपुर का भंजन करती है॥

पर नूपुर इतने निष्ठुर हैं फिर वीणा के बँध जाते हैं ।

नूपुर जुड़ते रहते हैं , वीणा जीते जी मरती है।

प्रस्फुटित होता ज्वाला सदृश, जब जिसे दबाया जाता है।

वीणा की पीड़ा वह जाने जो सदियों से सताया जाता है॥

अब वीणा नूपुर धारण नहीं करेगी न वह कहलायेगी दोषी।

अब उनके समाज में पैदा होंगे, लाखों लाखों सन्तोषी॥

मिली प्रतिष्ठा वीणा को विकसित होगी बिन पीड़ा के ।

घायल करते थे जो वह नूपुर, साथ सदा होंगे अब वीणा के॥

बाल काला तैल

एक तेल कम्पनी ने बालों के लिए तेल बनाया।

धुंआ धार प्रचार करवाया, इसे बालों में लगाओ।

काले बाल काले ही रहेंगे,

हजारों लोंगो ने तेल खरीदा।

जिसको पूंछो जवाब मिले तेल लेने गये हैं॥

काले बाल सफ़ेद होने लगे।

लोग शिकायत लेकर कम्पनी जाने लगे।

प्रचार अधिकारी ने बताया हमारा दावा सच्चा है।

शीशी पर चिपका लेबेल नहीं पढ़ा।

एक नहीं इसे लाखों लोंगो ने आजमाया है।

कौन कहता है इसे सर में लगाओ।

हमने तो इसे दाढ़ी के लिए बनाया है॥

क्रास चेक

भद्र महिला ने बैंक क्लर्क को चेक दिया,

बोली हाय अब तो पेमेंट कर दो।

कितना इंतजार कराओगे।

क्लर्क ने चेक देखा किनारे दो लाइने खिची थी।

सर हिलाते, भई इसका तो पेमेंट नही हो सकता।

महिला ने उत्सुक्ता जतायी, तब क्लर्क ने बात बतायी,

यह चेक क्रास है इसका भुग्तान नहीं हो सकता काउन्टर के एक्रास्।

महिला बोली कोई बात नहीं,

यदि इस चेक पे नहीं हो सकती काउन्टर के एक्रास।

खुद घूम कर आती हूं अभी तुम्हारे पास।

चेक को दे दिया अफ़सर को समझ कस्टमर खास ।

अफ़सर बोला चेक तो बासी भी है।

महिला बोली तबियत ठीक है “ मुर्गियों को भी जुक़ाम होता है।“

खाना होता तो बासी ताजे की बात थी।

यह कागज की चेक बासी हो गयी।

लगता है बाहर से आये हो।

चेक तो आप ही देते है, इतनी पुरानी क्यों देदी

जो जल्दी बासी हो गयी- नयी देते।

खैर अब आगे रखना ध्यान मत दे देना पुरानी

अफ़्सर बोला रख देना जाते फ़्रिज मे जो बासी से बचानी॥

सोया आदमी

शाम होते ही मंदिरों में घन्टिया बजने लगीं।

फ़ायर ब्रिगेड समझ कर सड़क से भीड़ हटने लगी।

कुछ दूर पर उठ रहे थे आग के शोले।

देर से समझ में आया कि होलिया जलने लगी।

मैने सोचा था कि कुछ तो पाप कट जाएंगे,

इतनी लकड़ियां जलाकर,

पर पाप न कटा जगल की सारी लकड़िया कटने लगी।

प्रदूषण रोकने वाला पेड़ जलकर प्रदूषण फैलाने लगा॥

इतना धुंआ खाकर आदमी सो गया, खो गया इतना।

जगाने पर भी न जगा॥

भारतीय नारी

भारतीय नारी के आदर्श को दिखाने के लिए,

दूरदर्शन पर समाचर पढ़ाने के लिए,

एक नारी को बुलाया।

पश्चिमी वेशभूषा उतरवाकर साड़ी व अंगिया पहनाया॥

देश व विदेश के लोग जब इसे देखेगे,

भारतीय नारी का आदर्श स्वरूप देखेंगे ।

पड़ोसी देशों ने भी इसे देखा,

उन्हें भारतीय नारी भारतीय नहीं लगी॥

न नाक में नथुनी न कान में बाला

न चोटी न मांग में सिंदूर न गले मेम कंठ्माला।

उन्होंने सोचा शायद समय के साथ साथ भारतीय नारी भी बदल गयी होगी।

हम भी कभी भारत के हिस्से थे आज नहीं तो क्या ,

पर हमारे यहां की नारी

चाहे जैसे तुलना कर लीजिए

भारतीयता में भारत से है अब भी भारी

  1. Knol Author Foundation-KAF
  2. The Memory Guru of India- Research &News
  3. सच्ची कविताएं- भारत के स्मृति गुरु व कवि प्रो एन एल श्रमण
  4. हिन्दी नॉल लेखक फाउंडेशन-Hindi Knol Author Foundation
  5. भारत के स्मृति गुरू-स्मृति के चमत्कार -भाग दो
  6. The Memory Guru of India- A B C of Memory Part IInd
  7. The Memory Guru of India: Periodic Table(आवर्त सारणी)
  8. Memory Guru Quotes
  9. प्रो एन एल श्रमण -मेमोरी गुरु आफ इंडिया के उत्प्रेरक लेख
  10. How to spell (U K Eng ) : The Memory Guru of India
  11. भारत के स्मृति गुरू- स्मृति के चमत्कार
  12. Memory Guru ways to improve your English- THE MEMORY GURU OF INDIA
  13. THE MEMORY GURU OF INDIA-Memory Aid
  14. The Memory Guru of India-1000 Ways to improve memory
  15. THE MEMORY GURU OF INDIA -MEMORY INTRO
  16. विद्या -भारत के स्मृति गुरू प्रो एन एल श्रमण
  17. The Memory Guru of India- Learn Urdu in 2 Days
  18. The Memory Guru of India- Rules of Memory
  19. स्मरण शक्ति कैसे बढ़ायें- भारत के स्मृति गुरू
  20. દિ મેમોરી ગૂરૂ આફ ઇન્ડિયા (The Memory Guru of India)
  21. The Memory Guru of India(عوامل النسيان و مهارات تحسين الذاكرة
  22. The Memory Guru of India- Competitions
  23. THE MEMORY GURU OF INDIA-ZEN MEMORY
  24. THE MEMORY GURU OF INDIA-LEARNING
  25. The Memory Guru of India- A B C of Memory Part I
  26. THE MEMORY GURU OF INDIA-For Aged
  27. THE MEMORY GURU OF INDIA-EXAM TENSION
  28. Medications -The Memory Guru of India
  29. THE MEMORY GURU OF INDIA-SPEED MATH
  30. THE MEMORY GURU OF INDIA-Face Recognition
  31. THE MEMORY GURU OF INDIA-Calandar
  32. THE MEMORY GURU OF INDIA-SPELLINGS